जॉक्स : सफरजन वेंकेला…
नेकर्या तेर सस एकावन ऋपीया सोखडी डेने…
जमाई (रस्ते में) : जानु तोजी मम्मी ला… हेकडो सो एंसी जा सफरजन गेनी आयो हो… थोडो त ख्याल क्यो खपे जमाई अईंया आ….. ठला एकावन ऋपीया…. !!!
घरवारी (खार में) : ही वरी कोरो !!! जान…हेतरी गाल ला तोके…. चटे वेई.. मुजी मम्मी ला कीं प न बोलेजो हा……
तुं मुके कोठेला आवे होय क….
सफरजन वेंकेला…..
कच्छी भासा अतरे
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ऋक्क जेड़ी नक्कर सक्कर जेड़ी सीरीवारी,
अक्कड़ अनोखी अति गति रामबाणजी,
कुछेमें कड़क कच्छी पाणीजे कड़ाके वारी,
विजजे वराके जेड़ी जोत जिंधजानजी,
ताजी घोड़ो छुटे तुटे तोपजो गलोलो तेड़ी,
“काराणी” चे चोट कच्छी वाणीजी कमानजी
:कवि काराणी
सवार ओगइ सारी… :)
मथे वधा भतार भारी…
सीम न लजे मुके,
हाणे थइ मोसीबत भारी..
फोन करे पोछयो अधा के,
अधा सीम कदा आय पांजी..
अधा वठोओ ओटे गामजे,
नोटरम जमइ होइ बोरी..
फोन सोणी अधा ओपळ्यो,
लख लख जीयु दने चार गारीयुं..
ओठ जेदो थे तोय सीम
न लधे पांजी..?
थकी हारी आयो आउ पाछो,
खेळ वगरजी सीम रइ सारी..
अधा अचींधो अदो कढधो,
करींधो मगज मारी बोरी…
ब माडुंएजो भतार खाइ,
नंधरुं कयुं आउ भारी…
केजी सीम केडा ढगा केजो अधा,
रात वइ सवार ओगइ सारी..!!
कच्छीमे पंज डीं श्रीमद् प्रज्ञा पुराण कथा
http://kutchmitradaily.com/article.aspx?site_id=3&news_id=174735
कच्छी शायरी जी जलक
ने व्यसन वारा भा नकांमां,
प्राण वगर जी काया नकांमी,
ने मर्ये पोय ही मळे माया नकांमी
लागणीं वगर जा माडु नकांमां
ने नीती वगर जा नाणां नकांमां
मकान वगर जी बारी नकांमी,
ने अाखो डीं वोट्सअेप मे चोटी हुए
हेडी बायडी नकामी
विनय वगर जो ऋप नकांमु,
अने पां वगर ही ग्रुप नकांमु …
ध्यान थी वाचिजा भला
*ध्यान थी वांचिजा भला*
*वॅर*
*वैभव*
*व्यसन*
*अने व्याज*
*व्हाला थई ने*
*करिंधा ताराज*
*हिनिंके वधारिंधा त*
*वनाइंधा लाज*
*अने घटाडिंधा त*
*करिंधा राज*


