पां सार्यों उनीजी शहीदीके , कुलभान कयों जें जिंधगानी.
कच्छजी आनो शान मान लाय , सिलाम ! लख लख अय जानी !
कच्छजी आनो शान मान लाय , सिलाम ! लख लख अय जानी !
: माधव जोशी “अश्क”

सिज ने चंधर , तारा मंढल !
वसंधल मेघ मलार चितरीयां !
कुकड़ कागड़ो, हंस कबुतर,
तितर कलायल मोर चितरीयां !
हाथी घोड़ो , उठ गांय ने ,
रिढ़ ने बकरी , मे चितरीयां !
हिकड़े निनढड़े हथ जे विचमें ,
किस्मतजी आऊं , रेखा चितरीयां !
: माधव जोशी “अश्क”