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अशाढी बीजजी घणें वधायुं 🍨 साल मुबारक!
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बीज जे चंधरतां आसाड उतरे,
पालर वडरें जे पडरेंतां नितरे.
कामाय डिसीनॅ वग઼डो पाछो वरे,
खेतर खिली खीडू઼एं के नૉतरे.
न्यारे इंधरलठके नॅ रण प्यो ठरे,
मॅनथ भेराभेर, माडू઼ मन जोतरे.
चૉपा चरॅं जीव मातर सौको परे,
तराके करे तिलक टुबण पिई तरे.
नयें वरेमें, कच्छी नईं आस भरे,
मोरजी पीछीसें नां चितर चितरे.
अमृताबा डी.जाडेजा.
तुंबडी कच्छ

नये वरेजी वधायुं.साल मुबारक! सुभ डियारी ! मिणींके डियारी जी हार्दिक सुभेच्छाउं

जोतथी डीयो,
डीयेथी डीयारी
डीयारीथी आत्मा तंई,
हेज हुंभ पिरगटे,
थियॅ मिणीजो सुभ मंगल,
अंतरमनजो अंधीयारो मिटॅ
पिरगटे ग्यान जोत.
मिणी के डीयारी ज्यूं सुभकामनाऊं
सुभ नवरात्री २०२२ ! Shubh Navratri 2022

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||
Mata je madh ja Live darshan 2022 (www.matanamadh.org)
https://youtu.be/I-lerKHDduE
या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
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http://idiva.com/photogallery-ifood/12-vrat-special-recipes-to-prep-for-navratri/32381
🌹 सुभेच्छाउं डीयूंता 🌹
🌴सवंत २०७८🌴
नउं वरे विने न त्रांसो ,
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
नबरो भधले ऊ पासो,
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
नेढूं भनी भले विठा
जिजा नेढूं भनी रोजा
वरे रे आंजो खासो,
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
ऐयूं संसारी संसारमें रुंता
अचे पैयूं उपाधीयूं
मिले नसीभजो जासो
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
मंगधल अचे न ઑडा,
खीर में धूईने डेणा
कारतकथी अचे आसो,
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
मान मरतबो मिले जिजो
चमके अभमें कांत तारो
मथे गरुकृपाजो चांसो
एडी सुभेच्छाउं डीयूंता
आयो अज नउं वरे
(ढाळ- झीणो झीणो उडे रे गुलाल )
खिली खिली मिली गिनूं पां,
आयो अज नउं वरे
बख विजी मिली गिनूं पां,
आयो अज नउं वरे…
सतोतेर विईने , अठोतेर आवई
विक्रम संवतजी, साल भधलाई
डटो नउं लगाई गिनूं पां,
आयो अज नउं वरे
सूकनमें मीठो, उथी गिनूतां
भांक फूटे ने , सड सूणूंता
मीठो गिनी वधाई गिनूं पां,
आयो अज नउं वरे
गडा भरीने , हुंभ ठलायूं
हाल पुछीने , हेत वतायूं
हींयारी से भिंजाई गिनूं पां
आयो अज नउं वरे
संसार चकीमें, अटो पीसायूं
कांत आतमके, अना भीसायूं
गुरु वाणी पिराई गिनूं पां
आयो अज नउं वरे





