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Posts under ‘Kutchi Kavita,Chovak,Sahitya (Poetry, Quotes, Literature)’

मिणींके सुभ नवरात्री ! મિળીંકે શુભ નવરાત્રી ! Shubh Navatri 2026!

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

Mata je madh ja Live darshan 2026 (www.matanamadh.org)
Mata jo madh website https://matanamadh.org/

जय माताजी !

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

Navratri Vrat Recipes
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http://idiva.com/photogallery-ifood/12-vrat-special-recipes-to-prep-for-navratri/32381

अलग कच्छ राज्य : कीर्तिभाई खत्री साथे हकडी मुलाकात

कच्छ अलग राज्य भनायला आह्वान

कच्छ मे वधारेमे वधारेमे रोजगारजी तकुं ओभी करेला मिणीं कच्छीयें के अरज आय.
मिणींके कच्छी भासा मेज बोलेजी अरज आय.
जय कच्छ !

KachchhSeperateState_1611

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पंज महत्वजा कार्य पांजे कच्छ ला

पांजी मातृभूमी कच्छ, मातृभासा कच्छी ने पांजी संस्कृति ही पांला करे अमुल्य अईं. अज कच्छ में ऊद्योगिक ने खेतीवाडी में विकास थई रयो आय. बारनूं अलग अलग भासा बोलधल माडु प कच्छमे अची ने रेला लगा अईं. हॅडे वखत मे पां पांजी भासा ने संस्कृति के संभार्यूं ही वधारे जरूरी थई व्यो आय. अमुक महत्व जा कार्य जे अज सुधी पूरा थई व्या हुणा खप्या वा ने जे अना बाकी अईं हेनमेजा जे मिणीयां वधारे महत्वजा अईं से नीचे लखांतो.

१. चोवी कलाक जो कच्छी टी.वी.चेनल
अज जे आधुनिक काल में जमाने भेरो हले जी जरूर आय. अज मडे टी.वी. ने ईंटरनेट सुधी पोजी व्यो आय. हॅडे मे पांजा कच्छी माडु कच्छी भासा मे संस्कृति दर्सन, भजन, मनोरंजन, हेल्थ जी जानकारी ने ब्यो घणें मडे नेरेला मगेंता ही सॉ टका सची गाल आय. हेनजे अभाव में पांजा छोकरा ने युवक पिंढजी ऑडखाण के पूरी रीते समजी सकें नता. खास करेने जे कच्छ जे बार रेंता हु कच्छी भासा ने संस्कृति थी अजाण थींधा वनेंता.
कच्छी टी.वी.चेनल ते चॉवी कलाक कच्छी भासा में अलग अलग जात जा प्रोग्राम जॅडीते न्यूज, सीरीयल, हास्य कलाकार, खेतीवाडी जा सवाल जवाब, भजन, योगा,….नॅरेला मलें त कच्छी माडु धोनिया में केडा प हुअें कच्छ हनींजे धिल जे नजीक रॅ ने कच्छ प्रत्ये ने कच्छी भासा प्रत्ये गर्व वधॅ. भेगो भेगो पिंढजी ऑडखाण मजबुत थियॅ. ही कार्य मिणींया महत्वजो आय.
२. स्कूल में १ थी १० सुधी कच्छी भासा जो अभ्यास
अज कच्छ जे स्कूल में बो भासाएँ में सखायमें अचॅतो गुजराती ने ईंग्लीस. कच्छी भासा जे पांजी मातृभाषा आय ने घणे विकसित आय ही हकडी प स्कूल नाय जेडा १ थी १० धोरण सुधी सखायमें अचींधी हुए. कच्छी भासा जे उपयोग के वधारे में अचॅ त ही कच्छीयें ला करे सारी गाल आय ने स्कूल में सखायमें अचे त हनथी सारो कोरो. भोज, गांधीघाम जॅडे सहेरें में जेडा बई कम्युनीटी ( गुजराती,सींधी,हींदीभाषी,….) जा माडु प रेंता होडा ओप्सनल कोर्स तरीके रखेमें अची सगॅतो. १ थी १० क्लास सुधीजो अभ्यासक्रम पांजा कवि, साहित्यकार ने शिक्षक मलीने लखें त हेनके स्कूल में सखायला कच्छी प्रजा मजबूत मांग करे सगॅती. जॅडीते गुजरात, महाराष्ट्र,…. मे मातृभासा जो अभ्यासक्रम त हुऍतोज.

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असीं कच्छी

असीं कच्छी
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वतन जी वालप नें हुभ जा संचरें विठा “सन”

परडेस में पण कच्छी सुणो त चुसा थीएं “कन”

मीं क मेंमाण अचे तॅर मुरके असांजो “मन”

पिंढ जे पंध हल्या विञो पचायुं नं केजो “पन”

डातारी नें धरमाधा में खरच्युं असांजो “धन”

बरुको नें निमराइ वारो’अरूर’ असांजो
“अन”

:अरूर भा
#(सन, कन ,मन, पन ,धन,अन)

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અસીં કચ્છી

વતન જી વાલપ નેં હુભ જા સંચરેં વિઠા “સન”

પરડેસ મેં પણ કચ્છી સુણો ત ચુસા થીએં “કન”

મીં ક મેંમાણ અચે તૅર મુરકે અસાંજો “મન”

પિંઢ જે પંધ હલ્યા વિઞો પચાયું નં કેજો “પન”

ડાતારી નેં ધરમાધા મેં ખરચ્યું અસાંજો “ધન”

બરુકો નેં નિમરાઇ વારો’અરૂર’ અસાંજો
“અન”

धीरुं

धीरुं
*****
धीरुं अंईं धनभाग पांजो,
मिठडो मिठडो चाग पांजो.

कच्छडेजो वरसाद पांजो,
झरणेजो कलनाद पांजो.
फुलेंसें भर्यो भाग पांजो धीरुं

हुंभजा झांझर झमझम झमकें,
खिलखिलजी खींकार चमके.
जयजयवंती राग पांजो. धीरुं

धीरुं खोलीएं नंईं नंईं बारी,
डिसी अभ अटारी विनुं वारी वारी.
अंईं फगणजो फाग पांजो. धीरुं

धीरुं आवीयुं, धीरुं आवीयुं,
खणीनें आवियुं सुखजयुं चावीयुं.
खुशीएंजो नांय ताग पांजो.धीरुं

गुलाब देढिया

कच्छी कवि सम्मलेन Dombivili , पनवेल Kavi Sammelan Mumbai

Kavi Sammelan Mumbai
https://www.youtube.com/live/gMisAPpb8H0?si=X2DS4Q7LJDCTjtGN Panvel, Mumbai –> https://www.youtube.com/watch?v=ENR66eqdFDc

कच्छी कवि सम्मलेन Kachchhi Kavi sammelan

न भोलज

न भोलज
पुजी विने सिखरतें प, तूं कॅनी तरीयो न भोलज
नतो भने घर, कॅनी सिखरें, ही फरीयो न भोलज

पिंढजें के छडी हिडा हुडा, तूं कॅनी धोडुं न कढज
वार नती लगे, कीं विखरे, जीं गिरीयो न भोलज

मीर के माल डिईने मजूर के, तूं कॅनी प न मारज
तૉजी कठणांईके, संभारे, ऊ साथीयो न भोलज

वाटूं ब डिसांजे सचाई ने, खोटाईज्यूं ई सारज
इगीया वधेला, पग पसारे, तूं गारीयो न भोलज

जॅडो तूं पोखीनें एडिज, निकी मिले तॉके उपज
मिल्यो साथ, वगर विसारे, ई जारीयो न भोलज

कींक डींने त कींक मिलंधो, वसंत ई धारो समज
अचेती वस, जीं वडरे, ई कॅनी धरीयो न भोलज
* वसंत मारू… चीआसर

Ahankar ke chadi ne hane….Kutchi Prathna Song

आवई आषाढी बीज 2024 कच्छी साहित्य मंडळ (भुज) આવઈ આષાઢી બીજ 2024 કચ્છી સાહિત્ય મંડળ (ભુજ)

नीस्वारथ

नीस्वारथ
मधध कर्यो…
फायधे विगर

हिलो मिलो…
मतलभ विगर

जींधगी जीयो…
डेखाडे विगर

सेवा कर्यो…
मेवे जी आसा विगर

करम कर्यो…
फड઼ जी आसा विगर

रॅयाण कर्यो…
धिल के भंध के विगर
: वसंत मारू…चीआसर
નીસ્વારથ
મધધ કર્યો…
ફાયધે વિગર

હિલો મિલો…
મતલભ વિગર

જીંધગી જીયો…
ડેખાડે઼ વિગર

સેવા કર્યો…
મેવે જી આસા વિગર

કરમ કર્યો…
ફડ઼ જી આસા વિગર

રૅયાણ કર્યો…
ધિલ કે ભંધ કે વિગર
– વસંત મારૂ…ચીઆસર

मोजसें हलूतां

मोजसें हलूतां
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मोजसें जीयूतां, ने मोजसें मिलूतां
मोजमें फिरुंतां,ने मोजसें हलूतां

न चिंधा रखूंतां, न चिंधा कडॅ खणूंतां
वेड઼ाके मान डियूंतां,ने मोजसें हलूतां

आसाउ प वडीउं, ऊथीने जगाईए
छडी पग भर्यूता,ने मोजसें हलूतां

नता पू कडॅ प लेखे जोखेजे पांपणें
थेओ ई नॅरीयूंतां,ने मोजसें हलूतां

नेईयूं वसधे मीं छले, कंधे कांत धोड઼े
असीं सडा छलूतां,ने मोजसें हलूतां

कांत ~ तुंबडी

મોજસેં હલૂતાં
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મોજસેં જીયૂતાં, ને મોજસેં મિલૂતાં
મોજમેં ફિરુંતાં,ને મોજસેં હલૂતાં

ન ચિંધા રખૂંતાં, ન ચિંધા કડૅ ખણૂંતાં
વેડ઼ાકે માન ડિયૂંતાં,ને મોજસેં હલૂતાં

આસાઉ પ વડીઉં, ઊથીને જગાઈએ
છડી પગ ભર્યૂતા,ને મોજસેં હલૂતાં

નતા પૂ કડૅ પ લેખે જોખેજે પાંપણેં
થેઓ ઈ નૅરીયૂંતાં,ને મોજસેં હલૂતાં

નેઈયૂં વસધે મીં છલે, કંધે કાંત ધોડ઼ે
અસીં સડા છલૂતાં,ને મોજસેં હલૂતાં

કાંત ~ તુંબડી

मास्तर डीं जीयुं वधाईंयूं

मास्तर
घरथी जुंढा थिई विनणूं पॅ नीसाड़
वाल वसांया वला असांजा मास्तर

एकडे एकथी बाराखडीजी जातर
ई सिखांया वला असांजा मास्तर

रमंधे भणंधेने वध्या असीं इगीया
पकल करांया वला असांजा मास्तर

संस्कृती ने सन्मानजी वाटतें हलेला
डिस वतांया वला असांजा मास्तर

इनीवट सिखी कईक अभके छूंएता
वडा भनांया वला असांजा मास्तर

न भुलज वसंत इनीजा ही उपकार
हींयू छिलांया वला असांजा मास्तर
– वसंत मारू… चीआसर
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🙏 मास्तर डीं जीयुं वधाईंयूं 🙏