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भिजॅ अख ज कॅनी …

भिजॅ अख ज कॅनी, डिसी दुख परायो,
फेरो सफड़ जीव, पृथ्वी ते आयो।

मालक दिने आय, अवतार मोंघो,
समजी ने जियो, म फोगट विञायो।

अज आय पांजो, हुओ काल बे जो,
वरी पण सवारे, ई थींधो परायो।

करे कोय कॅनीं, उपकार आंते,
वारीजा पाछो, करीने सवायो।

धुसमण जूको छ, विठा पांजे मनमें,
‘मोहन’ विड़ी बारां, तेंके भजायो…

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