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कच्छी दंगल (मलखडो)


Royal Antara Kutchi Olympia 2016 – Glimpses,

दोस्त दिलेर ..

दोस्त दिलेर ने
वला मुंजा
बधे न रखाॅ धन माल
ख्याॅ खारायाॅ
ने खॅरात कर्याॅ
कें डेठ्ठी आय काल

सहारो

सहारो
*****

भनी सगुं त केंजो क सहारो भनुं,
केंजे क जीवन जा तारणहार भनुं ,

जीवन त हकडे वडे झाड जॅडो आय ,
कोइ क निर्दोस पंखीडे जो माडो भनुं ,

मंझील ने ध्येय मेणीं जे जीवन में वेंता,
कोइ क जीवनसाथी जो सथवारो भनुं ,

धिल थी धिल मेंलॅ ई त प्रॅमी अें जी रीत आय,
पण कोइ क प्रॅमाणधिल जो धिलदार भनुं ,

“श्रवण” जेडा त पां न चॉवाजुं,
पण पां पांजे माँ बाप जो सहारो भनुं

कवि हिंमत गोरी
સહારો
******

ભની શગું ત કેંજો ક સહારો ભનું ,
કેંજે ક જીવન જા તારણહાર ભનું ,

જીવન ત એકડે વડે ઝાડ જેડો આય ,
કોઈ ક નિદૉષ પંખીડે જો માળો ભનું ,

મંઝીલ ને ધ્યેય મેણીં જે જીવન મેં વેતાં ,
કોઈ ક જીવનસાથી જો સથવારો ભનું ,

ધિલ થી ધિલ મેંલે ઈ ત પ્રેમી એ જી રીત આય ,
પણ કોઈ ક પ્રેમાળધિલ જો ધિલદાર ભનું ,

“શ્રવણ” જેડા ત પાં ન ચોવાજું ,
પણ પાં પાંજે માઁ – બાપ જો “સહારો” ભનુ .

Kavi હિમત ગોરી

लखपत

।। लखपत ।।
*लखें जो लोडार, लखपत।
भारत जो पेरेधार, लखपत।
* कोटेसर कटेसर मड माता जो।
नारणसरजी पार, लखपत।
* लालछता ने पीर सावलो।
नानक जो धरबार, लखपत।
* कडे कमाणीयुं थइ लखें जी।
कडे भनी वीठो भेकार, लखपत।
* कारी खाण्युं कोलसें वारी।
लायटें जो चमकार लखपत।
* न चरो चोपें के पाणी पीतेला।
डीठा कंइक डुकार, लखपत।
* धरती रूपारी धांय घणा थींये।
जडे मीं वुठो श्रीकार, लखपत।
*भाडरो सांध्रो नरो गोधातड।
पोख जा आधार, लखपत।
* मेंयु गोइयुं जा खीर ने मावो।
भनी वयो शाउकार लखपत।
* धवाखाने मे धागतर न’वे।
मास्तर वगर जी निशार, लखपत।
* मधध बार जी कडे प न मीले।
मालिक ते ऐतबार, लखपत।
* गीने वारा गीने भले तोजे नां ते।
डिनो वारो अंइ दातार, लखपत।
* “जय” ऊथों पां भेठ भंधे ने।
धुनिया के चों ” न्यार, लखपत।

: हितेस जोसी
reference : https://www.facebook.com/tejpaldharsinagda.tej

सुभ दियारी ! साल मुबारक !


subhdiwali2016

मुंजे मनजी गाल !

मुंजे मनजी गाल
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न वाद खपॅ न विवाद खपॅ
पांके त बस,पेंढमे प्रेमभाव खपॅ

न नाम खपॅ न तख्ती खपॅ
पांके त बस “माँ” जी भक्ती खपॅ

न पद खपॅ न मान खपॅ
पांके त बस पांजो संगठन खपॅ

न सायर खपॅ न वख्ता खपॅ
पांके त बस पांजी अेकता खपॅ

जय माताजी !
जय कच्छ !

મુંજે મન જી ગાલ
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ન વાદ ખપે,ન વિવાદ ખપે
પાંકે ત બસ, પેંઢ મેં પ્રેમભાવ ખપે……
ન નામ ખપે,ન તખ્તી ખપે
પાંકે ત બસ,”માં”જી ભકત્તી ખપે……
ન પદ ખપે ,ન માન ખપે
પાંકે ત બસ, પાંજો સગઠન ખપે…….
ન શાયર ખપે,ન વકત્તા ખપે
પાંકે ત બસ,પાંજી એકતા ખપે……
જય માતાજી

सुभ नवरात्री २०१६ ! Shubh Navratri 2016

navratri2016a
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

Mata je madh ja Live darshan 2016 (www.matanamadh.org)

जय माताजी !
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मिडे कच्छी मात्रुभासा कच्छीज बोलें

कच्छी साहित्य अकाडमी द्वारा आयोजीत समारोह मे हरेक कच्छी पंढजी मात्रुभासा कच्छीज बोलें ही हाकल केमे आवई आय.
वधारे डिटेल नॅर्यॉ

क्च्छ्ते वठा मीं…

वावड आया वतनजा
के क्च्छ्ते वठा मीं
हल मनवा हाण्हे हेता
हेत्ते नेकरें नता दीं
कच्छ्ड़ो असान्जो कामणगारो
जेडो केसर सिंह
आफत अचें अज्पण ओखियुं
तोय तोय हटींन दियुं इं
व्हाले वतनजे विरहमें
धेल धाम रे कीं
सारस वगर सारसी
प्राण डै दे जीं
किर्ती चेतो हल्यो वेने
सिकंधर हल्योवेयो जीं
बधी सधी बारे वेज्धा
पोय कच्छ पोज्ने कीं
जय मात्रुभूमि !